लोग रात भर सो क्यों नहीं पाते?HealthPlanet

Posted on Mon 12th Dec 2022 : 11:27

नींद ना आने का कारण

अगर रात को नींद ना आने (raat ko neend na aana) की समस्या है और आप अपनी रातें केवल करवटें बदल कर गुजार रही हैं तो इसके पीछे ये कारण हो सकते हैं :-

तनाव (stress)

नींद ना आने के पीछे सबसे आम वजह तनाव हो सकती है। तनाव होने पर शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है जो कि एक स्ट्रेस हार्मोन है। इसके कारण शरीर आराम की स्थिति में नहीं रह पाता और ब्रेन एक्टिव रहता है जिससे नींद आना मुश्किल हो जाता है। रिसर्च भी बताती हैं कि तनाव को नींद ना आने का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि जिस चीज से आपका तनाव बढ़ रहा है उसकी भूमिका भी आपकी नींद को बाधित करने में काफी अहम है।

स्लीप एप्निया (Sleep Apnea)

स्लीप एप्निया एक स्लीप डिसऑर्डर (नींद विकार) है जिसके कारण या तो नींद पूरी नहीं होती या पूरी नींद के बाद भी आप थका-थका महसूस करते हैं। रात में सोते वक्त बार-बार सांस लेने में परेशानी होने के कारण बार-बार नींद खुल जाती है जिससे आप क्वालिटी स्लीप (बढ़िया नींद) नहीं ले पाते हैं और अधिक समय सोने के बाद भी अगले दिन आलस महसूस होता है।

डिहाइड्रेशन (Dehydration)

अपने बिजी शेड्यूल के कारण हम दिनभर उचित मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करना अक्सर भूल जाते हैं। पानी पीने में हमारी लापरवाही भी हमारी थकान बढ़ा देती है, और ऐसे में सिरदर्द की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि आपका दिन भर का काम प्रभावित होता है। रिसर्च बताते हैं कि क्रॉनिक डिहाइड्रेशन भी नींद ना आने की वजह बन सकती है।

इन्सोम्निया (insomnia)

अगर आपको रात में नींद ना आने, बार-बार नींद खुल जाने, रात में नींद ना खुलने के बाद दोबारा सो पाने में दिक्कत और सुबह भी जल्दी नींद खुल जाने जैसे लक्षण दिख रहे हैं तो यह इन्सोम्निया हो सकता है। इन्सोम्निया एक ऐसा स्लीप डिसऑर्डर है जो आपको रात में नींद ना आने और दिनभर थका हुआ महसूस करने का कारण हो सकता है।

बहुत अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन

खासतौर पर ऑफिस में काम करते समय जब हमारी एनर्जी खत्म होने लगती है और हमें नींद आ रही होती है तो हमें कॉफी बहुत लुभाती है। लेकिन इसकी अधिक मात्रा हमारे शरीर पर विपरीत प्रभाव भी डाल सकती है। जब हम इसका सेवन करते हैं तो कैफीन का प्रभाव हमारे शरीर में लंबे समय तक बना रहता है। यह हमारे शरीर में एड्रिनल हॉरमोन को बढ़ाता है जिससे हम दोबारा एक्टिव और एनर्जेटिक हो जाते हैं। जैसे ही हमारे शरीर से इसका प्रभाव कम होने लगता है तो हम अचानक फिर से थकावट महसूस करने लगते हैं। इसलिए चाय-कॉफी का सेवन कम करें।

सोने से पहले फोन इस्तेमाल करना

सिम्पल दिखने वाली इस आदत को छोड़ पाना बेहद मुश्किल है। फोन से निकलने वाली आर्टिफिशियल लाइट, ब्रेन को यह संकेत देती है कि उसे जागते रहना है क्योंकि यह दिन के प्रकाश जैसी लगती है। यह धोखा हमारी प्राकृतिक लय (circadian rhythm) को बिगाड़ देता है। जिससे रात में नींद कम आती है और फिर सारा दिन थका-थका महसूस होता है।

वीकेंड पर देर से सोना और देर से उठना

हम सभी वीकेंड पर खुद को ये गिफ्ट देते हैं। हम शक्रवार और शनिवार की रात को देर तक जागते और टीवी, वेब सीरीज देखते रहते हैं जिसके चलते हम अगले दिन देर से उठते हैं। इस कारण हमारा स्लीप साइकल खराब हो जाता है। इसे बायोलॉजिकल क्लॉक (biological clock) भी कहा जाता है। इसका मतलब है कि हमारे शरीर को एक ही समय सोने की आदत होती है जिसे आप वीकेंड पर खराब कर लेती है और इससे नींद नहीं आती।

गतिहीन लाइफस्टाइल

अगर आप दिनभर बैठे रहकर काम करती हैं या किसी डेस्क जॉब में हैं तो यह एक कारण भी आपकी नींद को प्रभावित करता है। जब आप दिनभर निष्क्रिय रहती हैं या बहुत कम मूवमेंट करती हैं तो इससे आपको रात में बेहतर नींद नहीं मिल पाती, जिसके कारण आप दिनभर सुस्त और थकान महसूस करती हैं। अगर आप एक्सरसाइज करती हैं तो आप ख़ुद महसूस करेंगी कि वर्कआउट सेशन के बाद आपको रात में बेहतर नींद आती है।

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